पुरुष की कहानी-निधि विश्वकर्मा

पुरुष
जब जन्म लेता है एक स्त्री की कोख से,तो खुशियां मनाई जाती है
पर ना जाने कितनी ज़िम्मेदारिया वो साथ लाता है,क्युकी पुरुष के रूप में जन्म लिया है उसने
शुरू से सबकी उम्मीदों का झोला टांगे शुरू होती है उसकी यात्रा
घर चलाने की चिंता के साथ सबकी उम्मीदों पर खरा उतरने की परीक्षा साथ चलती है
पत्नी आती है तो ढेरो आशाओं के साथ,घर ,माता पिता व पत्नी के बीच सामंजस्य बिठाने की जद्दोजहद से गुजरता है एक पुरुष
माता पिता,बच्चे,पत्नी व घर की ज़रूरतों को पूरा करते करते उसके सुख कहाँ खो जाते है पता ही नही चलता,बस एक ही रास्ता ओर एक ही दिनचर्या के बीच खुद को पहचान पाना भी मुश्किल
मैं नमन करती हूं पुरुष को
जो अपने जीवन मे कई प्रकार के संघर्षो से गुजरकर भी सबके चेहरे पर मुस्कुराहट लाने की कोशिश करता है ,एक बेटे के रूप में,पति के रूप में,पिता के रूप में ओर नौकरी में एक कर्मचारी के रूप में

निधि विश्वकर्मा

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